Congress SP Alliance: लोकसभा चुनाव 2024 के लिए कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने गठबंधन का ऐलान कर दिया है, दोनों पार्टियां मिलकर चुनाव लड़ेंगी. यह गठबंधन मध्य प्रदेश के लिए भी हुआ है.
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Khajuraho Lok Sabha Seat: कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच आगामी लोकसभा चुनाव के लिए गठबंधन की आधिकारिक घोषणा कर दी गई है. गठबंधन में उत्तर प्रदेश के साथ-साथ मध्य प्रदेश में भी हुआ है. मध्य प्रदेश की एक लोकसभा सीट पर समाजवादी पार्टी अपना प्रत्याशी उतारेगी, जबकि बाकि 28 सीटों पर सपा कांग्रेस का समर्थन करेगी. खजुराहो लोकसभा सीट से फिलहाल बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा लोकसभा सांसद हैं.
यूपी से सटी है खजुराहो लोकसभा सीट
समाजवादी पार्टी और कांग्रेस में गठबंधन की चर्चा सियासी गलियारों में पहले से चल रही थी, लेकिन आज दोनों पार्टियों ने गठबंधन का ऐलान कर दिया है. मध्य प्रदेश में समाजवादी पार्टी को एक लोकसभा सीट दी गई है. हालांकि बताया जा रहा है कि सपा ने खजुराहो के साथ-साथ टीकमगढ़ लोकसभा सीट भी मांगी थी. क्योंकि दोनों ही लोकसभा सीटें यूपी से सटी हैं और यहां समाजवादी पार्टी का जनाधार माना जाता है. लेकिन गठबंधन के तहत केवल खजुराहो सीट पर ही बात बनी है. टीमकगढ़ सीट कांग्रेस के पास ही रहेगी. टीमकगढ़ लोकसभा सीट से मोदी सरकार में मंत्री वीरेंद्र खटीक फिलहाल सांसद हैं.
विधानसभा चुनाव में भी चली थी गठबंधन की चर्चा
बता दें कि यह पहला मौका है जब मध्य प्रदेश में दोनों पार्टियों के बीच गठबंधन हुआ है. लेकिन इससे पहले 2023 के विधानसभा चुनाव में भी गठबंधन की खबरें चली थी. लेकिन तब कांग्रेस और सपा में बात नहीं बन पाई थी. लेकिन इस बार बात बन गई है. बता दें कि विधानसभा चुनाव के दौरान कमलनाथ के एक बयान के बाद कांग्रेस और सपा में तल्खी देखी गई थी. ऐसे में दोनों पार्टियों ने अलग-अलग चुनाव लड़ा था. कई सीटों पर सपा और कांग्रेस के अलग-अलग लड़ने से वोटों में बिखराव देखा गया था. लेकिन लोकसभा चुनावों से पहले अब दोनों पार्टियां साथ आ गई हैं.
खजुराहो सीट पर BJP का मजबूत होल्ड
सपा-कांग्रेस गठबंधन के तहत समाजवादी पार्टी खजुराहो लोकसभा सीट पर चुनाव लड़ेगी. लेकिन इस सीट पर बीजेपी की मजबूत पकड़ मानी जाती है. 2019 के चुनाव में बीजेपी के वीडी शर्मा ने कांग्रेस की कविता सिंह को यहां बड़े अंतर से हराया था. जबकि 1989 से 2019 के बीच हुए 9 लोकसभा चुनावों में से केवल एक बार 1999 में कांग्रेस ने यहां जीत हासिल की थी, जबकि बाकि के सभी 8 चुनावों में बीजेपी की जीत हुई थी. सूबे की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती भी यहां से लगातार चार बार सांसद चुनी गई थी.
जातिगत समीकरण अहम वजह
बता दें कि खजुराहो लोकसभा सीट सपा के खाते में जाने की वजह जातिगत समीकरण माने जाते हैं, दरअसल, इस सीट पर ओबीसी खास तौर पर यादव मतदाताओं की बड़ी संख्या है. इसके अलावा इस सीट के तहत आने वाली कई विधानसभा सीटों की सीमा उत्तर प्रदेश से लगी है. ऐसे में कांग्रेस ने जातिगत समीकरणों के तहत ही सपा को यह सीट दी है. ताकि बीजेपी को यहां घेरा जा सके. खजुराहो लोकसभा सीट में 8 विधानसभा सीटें आती हैं 2023 के चुनावों में सभी सीटों पर बीजेपी ने एकतरफा जीत हासिल की थी. ऐसे में यहां सपा-कांग्रेस गठबंधन की राह आसान नहीं होने वाली.