जयपुर: मेयर और मेयर पति पर ST-SC का मुकदमा दर्ज कराने की तैयारी,कमिश्नर ने मांगी अनुमति
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जयपुर: मेयर और मेयर पति पर ST-SC का मुकदमा दर्ज कराने की तैयारी,कमिश्नर ने मांगी अनुमति

जयपुर न्यूज: मेयर मुनेश गुर्जर और मेयर पति पर ST-SC का मुकदमा दर्ज कराने की तैयारी की जा रही है. अतिरिक्त आयुक्त राजेन्द्र वर्मा की शिकायत पर सरकार से अनुमति मांगी गई है. कमिश्नर हैरिटेज ने सरकार को पत्र लिखकर FIR की अनुमति मांगी है.

जयपुर: मेयर और मेयर पति पर ST-SC का मुकदमा दर्ज कराने की तैयारी,कमिश्नर ने मांगी अनुमति

Jaipur: नगर निगम हेरिटेज में विवाद सुझलने की बजाय बढ़ता जा रहा हैं. पांच दिन से मेयर मुनेश गुर्जर अपने समर्थक पार्षदों के साथ आत्मसम्मान की धरने पर बैठकर लड़ाई लड़ रही हैं और अतिरिक्त आयुक्त राजेन्द्र वर्मा को हटाने की मांग कर रही हैं.तो दूसरी तरफ जयपुर नगर निगम हेरिटेज की मेयर मुनेश गुर्जर, उनके पति समेत 10 से ज्यादा पार्षदों के खिलाफ एससी-एससटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज करवाने की तैयारी चल रही है.

 कमिश्नर नगर निगम हेरिटेज ने सरकार को पत्र लिखकर मुकदमा दर्ज करवाने की अनुमति मांगी 

अतिरिक्त आयुक्त राजेन्द्र वर्मा की शिकायत के बाद कमिश्नर नगर निगम हेरिटेज ने सरकार को पत्र लिखकर मुकदमा दर्ज करवाने की अनुमति मांगी है. वर्मा ने इस पूरे घटनाक्रम में इन लोगों के अलावा कुछ बाहरी प्राइवेट व्यक्तियों पर भी जाति सूचक शब्दों से अपमानित करने, गाली-गलौच करने और धमकाने के आरोप लगाए है. अतिरिक्त आयुक्त वर्मा ने जो लेटर लिखा है उसमें पार्षदों और मेयर पर बंधक बनाने का आरोप लगाया है. 

वर्मा ने बताया कि 16 जून को हेरिटेज मुख्यालय में राजकीय कार्य कर रहा था, तभी दोपहर 3 बजे मेयर के यहां से मैसेज आया कि मेयर ने चैम्बर में बुलाया है. जिसके बाद उन्होंने 10 मिनट में पहुंचने का मैसेज करवाया. लेकिन 5 मिनट बाद ही कुछ पार्षद और बाहरी प्राइवेट लोग आए और टेण्डर की फाइल पर साइन नहीं करने की बात कहते हुए उन पर जोर-जोर से चिल्लाने लगे.

करीब 30 की संख्या में ये लोग उन्हें मेयर के चैम्बर में ले गए, जहां इन्होंने  रात 9 बजे तक बंधक बनाए रखा .जबकि उन्होंने वास्तविकता की जानकारी मेयर को दे दी थी कि वह 30 मई को अवकाश पर थे, इसलिए फाइल की कार्रवाई विवरण पर वह हस्ताक्षर नहीं कर सकते. 15 जून को उपासना समिति की बैठक में इस फाइल को कमिश्नर के पास भिजवा दिया है, इसलिए फाइल उनके पास पेंडिंग नहीं है.

अतिरिक्त आयुक्त राजेन्द्र वर्मा की ओर से राज्य सरकार की ओर से दो पत्र लिखे गए हैं. पहले पत्र में पूरे घटनाक्रम में शामिल जनप्रतिनिधियों पर कानूनी कार्रवाई के लिए पत्र लिखा हैं. वहीं दूसरे पत्र में राज्य सरकार से नगर निगम हेरिटेज की मेयर मुनेश गुर्जर, मेयर पति सुशील गुर्जर, उपमहापौर असलम फारूखी, पार्षद उमर दराज, नीरज अग्रवाल, शफी कुरैशी, सुनीता मावर, राबिया गुडएज, अंजली ब्रह्मभट्‌ट, आयशा सिद्धिकी, फरीद कुरैशी के अलावा वार्ड 12 पार्षद के पति मोहम्मद अख्तर, वार्ड 30 की महिला पार्षद का पुत्र, पार्षद का परिचित फूलचन्द और मेयर का परिचित बसन्त असवाल पर मुकदमा दर्ज करने की अनुमति मांगी हैं.

वर्मा ने अपने शिकायती पत्र में कहा है की उनसे जोर जबरदस्ती कर पत्रावली पर जबरन हस्ताक्षर कराने का प्रयास करने, राजकार्य में बाधा डालने, मझे जबरन बंधक बनाकर मेरे साथ गाली-गलौच करने और मुझे जातिसूचक शब्दों से अपमानित करने का अपराध करने वालों के विरूद्ध कानूनी कार्रवाई करने की मांग करने के साथ मुकदमा दर्ज करने की अनुमति मांगी हैं.

दरअसल पूरे विवाद की जड़ अस्थायी कर्मचारी (बिट्स) सिस्टम है. 600 बिट्स के लिए पिछले दिनों टेण्डर किए गए, जिसकी मंजूरी के लिए मेयर और उनके पार्षद अतिरिक्त आयुक्त राजेन्द्र वर्मा से साइन करवाना चाहते है. इसमें 5-5 बिट्स हर पार्षद को उपलब्ध करवाई जाएगी. जबकि 100 अतिरिक्त बिट्स कहा खपाई जाएगी, इसका कोई जिक्र नहीं है.

आपको बता दें कि बिट्स सिस्टम में सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार होता है.इसमें न तो कर्मचारी का कोई रिकॉर्ड होता है और न ही व्यक्ति की उपस्थिति. सबसे बड़ी बात इस मामले में पार्षदों को 5-5 कर्मचारी तो सफाई या दूसरे काम के लिए उपलब्ध करवा दिए जाते है लेकिन वह मौके पर काम नहीं करते और उनका भुगतान उठा लिया जाता है. इसे देखते हुए ही जयपुर नगर निगम में बिट्स सिस्टम साल 2018 में हमेशा के लिए खत्म कर दिया था.

 धीरे-धीरे पार्षदों का संख्याबल भी कम 

बहरहाल, बिपरजॉय तूफान ने अलग अलग जिलों में हलचल मचा रखी हैं लेकिन नगर निगम हेरिटेज में आए तूफान के बाद भी कोई हलचल नहीं हैं. हालांकि अब धरने में धीरे-धीरे पार्षदों का संख्याबल भी कम होता जा रहा हैं. सिविल लाइन क्षेत्र के पार्षद पहले ही दिन से धरने से दूरी बनाए हुए है. वहीं किशनपोल और आदर्श नगर विधानसभा क्षेत्र के भी पार्षदों की संख्या बहुत कम हैं. सिर्फ हवामहल विधानसभा क्षेत्र के पार्षद मेयर के साथ डटकर अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं. हालांकि फैसला राज्य सरकार को लेना है और फैसले पर निगाहें सभी की टिकी हुई हैं क्योंकि इस लड़ाई में कई शहर के नेताओं की वर्चस्व जुड़ा है.

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