Mahakumbh 2025: महाकुंभ में खूबूसरत मुस्लिम महिला के चर्चे, स्नान के बाद मचा बवाल, संगम में डुबकी लगाकर निकल गई मुंबई
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Mahakumbh 2025: महाकुंभ में खूबूसरत मुस्लिम महिला के चर्चे, स्नान के बाद मचा बवाल, संगम में डुबकी लगाकर निकल गई मुंबई

Mahakumbh 2025: महाकुंभ आए शबनम शेख इन दिनों सुर्खियों में हैं. उन्होंने प्रयागराज में संगम में आस्था की डुबकी लगाई. इसके साथ ही शबनम शेख ने कई संत महात्माओं के दर्शन कर उनका आशीर्वाद भी लिया. पढ़िए

Mahakumbh 2025

Mahakumbh 2025: मुंबई की मुस्लिम युवती शबनम शेख ने प्रयागराज महाकुंभ पहुंची. यहां उन्होंने संगम में आस्था की डुबकी लगाई है. शबनम शेख ने यहां कई संत महात्माओं के दर्शन कर उनका आशीर्वाद भी लिया है. इसके साथ ही मुस्लिम युवती ने कई सनातनी अनुष्ठानों में भी हिस्सा लिया. इतना ही नहीं, उन्होंने योगी सरकार की व्यवस्थाओं को बेमिसाल बताया है. महाकुंभ में शबनम शेख अयोध्या की तपस्वी छावनी पीठाधीश्वर जगतगुरु आचार्य परमहंस दास के शिविर में रुकी हुई थी. जगद्गुरु आचार्य परमहंस दास का शिविर महाकुंभ में सेक्टर 16 में लगा हुआ है.

फिर महाकुंभ आ सकती हैं शबनम
दो दिन रुकने के बाद महाकुंभ से शबनम शेख वापस मुंबई चली गईं. वह फरवरी में दोबारा महाकुंभ आ सकती हैं. प्रयागराज महाकुंभ में शबनम शेख वापस मुंबई चली गई है. वह फरवरी महीने में फिर से महाकुंभ आ सकती हैं. जगतगुरु परमहंस आचार्य ने ही महाकुंभ में शबनम शेख के त्रिवेणी स्नान से लेकर धार्मिक अनुष्ठानों में शामिल होने में मदद की है.

फूलों की बारिश से स्वागत
शनिवार को 23 वर्षीय शबनम शेख महाकुंभ पहुंची थी. इस दौरान वह मुस्लिम समुदाय के परंपरागत पोशाक में थी. उन्होंने शरीर पर नकाब पहन रखा था. तपस्वी छावनी पीठाधीश्वर जगतगुरु परमहंस आचार्य ने यहां फूलों की बारिश कर उनका स्वागत किया. इस शिविर में शबनम ने धार्मिक अनुष्ठानों में हिस्सा लिया. इस मौके पर उन्होंने कहा कि महाकुंभ में त्रिवेणी की धारा में आस्था की डुबकी लगाकर और यहां संतों के दर्शन कर उन्हें दिव्य अनुभूति हुई है. वह पहली बार महाकुंभ आई हैं. उन्होंने यहां के बारे में जो कुछ सुना था, उससे कई गुना ज्यादा सुखद एहसास हुआ. वह यहां चल रहे यज्ञ में भी शामिल हुई. 

क्या बोलीं शबनम शेख?
शबनम शेख ने बताया कि यहां पर वह निडर होकर आई. महाकुंभ में मुसलमानों की एंट्री बैन किए जाने की बहस के बीच यहां पहुंचने पर उन्हें कतई डर नहीं लगा. हर किसी ने उन्हें खूब सम्मान दिया. संतों के शिविर में उनका अभिनंदन हुआ. शबनम शेख यहां पहुंच कर इतनी अभिभूत हुई कि उन्होंने फरवरी में दोबारा महाकुंभ आने का मन बनाया है.

पैदल अयोध्या पहुंचीं थी शबनम
तपस्वी छावनी पीठाधीश्वर जगतगुरु परमहंस आचार्य की मानें तो शबनम शेख जैसी बेटियां समाज को जोड़ने का काम करती हैं. वह इस्लाम धर्म की है, लेकिन सनातन के प्रति उनके मन में जबरदस्त आस्था और सम्मान है. ऐसे लोगों का महाकुंभ में स्वागत है. विरोध और एतराज सिर्फ उस पर है तो गलत भावना के साथ सनातनियों की आस्था के समागम में आना चाहता है. आपको बता दें, शबनम शेख साल भर पहले अयोध्या में रामलला के भव्य मंदिर निर्माण की प्राण प्रतिष्ठा के उत्सव के मौके पर मुंबई से पैदल चलकर अयोध्या पहुंची थी. उस वक्त उनका स्वागत रास्ते भर जगह-जगह किया गया था. भगवान राम और सनातन के प्रति उनकी आस्था देखकर लोग हैरान हो गए थे. उन्होंने सुरक्षा कारणों से महाकुंभ में पहुंचने की जानकारी सार्वजनिक नहीं की थी.

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